सब दरवाज़े खोलो मेरी माँ ने आना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ताड़ियाँ बजाओ सारे ताड़ियाँ,

खुशियाँ मनाओ सारे खुशियाँ मनाओ,

सब दरवाज़े खोलो मेरी माँ ने आना,

बंद दरवाज़े खोलो मेरी माँ ने आना.....

पता नहीं माँ किधरो आवे,

एधरों आवे जा औधरो आवे,

बंद दरवाज़े खोलो मेरी माँ ने आना,

ताड़ियाँ बजाओ सारे ताड़ियाँ....

माँ जे आवे मैं किधर बिठावा,

किस जगह ते माँ दा आसन लावा,

दिल दे रस्ते खोलो मेरी माँ ने आना,

बंद दरवाज़े खोलो मेरी माँ ने आना,

ताड़ियाँ बजाओ सारे ताड़ियाँ....

ओह ता मिठिया मुरादां वंडदी,

ओह ता मिठड़े मेवे वंडदी,

झोलिया अपनी खोलो मेरी माँ ने आना,

बंद दरवाज़े खोलो मेरी माँ ने आना,

ताड़ियाँ बजाओ सारे ताड़ियाँ....

माँ दे नाल असा प्रीताँ लाईया,

प्रीताँ ला के असां तोड़ निभाइयाँ,

माँ नाल प्रीतां ला लो मेरी माँ ने आना,

माँ ने आना शेरांवाली ने आना,

बंद दरवाज़े खोलो मेरी माँ ने आना,

ताड़ियाँ बजाओ सारे ताड़ियाँ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।