तेरे मंदिरों की शान निराली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे मंदिरों की शान निराली,

हे माँ, तेरे मंदिरों की,

तेरे मंदिरों की शान निराली,

द्वार तेरे रंग बरसे, महारानीये,

द्वार तेरे रंग बरसे, महारानीये,

शेरावालिये, ज्योतावालिये,

जय माँ, जय माँ…….

मैया मन की मुरादें, पूरी करती,

हे माँ,

मैया मन की मुरादें, पूरी करती,

सबकी माँ भरे झोलियाँ, महारानिये,

शेरोवालिये, मेहरावालिये,

शेरावालिये, ज्योतावालिये,

जय माँ, जय माँ।

लाल चनुरी चढाउ, लाल चूड़ियां,

हे माँ लाल चुनरी,

लाल चनुरी चढाउ, लाल चूड़ियां,

मेहंदी लगाऊं हाथों पे,

शेरावालिये,

शेरोवालिये, मेहरावालिये,

शेरावालिये, ज्योतावालिये,

जय माँ, जय माँ….

बाजे ढोल नगाड़े, शहनाइयां,

हे माँ, बाजे ढोल ,

बाजे ढोल नगाड़े, शहनाइयां,

मैया तेरे मंदिरों में लाटावालिये,

शेरावालिये,

शेरोवालिये, मेहरावालिये,

शेरावालिये, ज्योतावालिये,

जय माँ, जय माँ…

चाँद धरती सितारों में तू है,

बास तेरा कण कण में, अम्बे रानिये,

अम्बे रानिये, ज्योता वालिये।

रघुवंशी ने अर्जी लगाईं, हे माँ,

सरजीवन ने अर्जी लगाईं,

मैया फ़रियाद सुनों जी, महारानिये,

चरणों का प्यार दे दो, महारानिये,

शेरावालिये,

शेरोवालिये, मेहरावालिये,

पहाडावालिये शेरावालिये,

जय माँ, जय माँ……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।