नईहर से मईहर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अबही ले अईलू ना ही घरे बाटे करे के व्यवस्था,

चले के बाटे दरबार मां के दूरे बाटे रास्ता.....

अजा ई यही जे इंतजाम ठीक बाटे,

राजा नईहर से हमरा मईहर नजदीक बाटे,

बाडी तैयार हमरा संगे चले के माई हमर,

बुकिंग करवले बाड़े गाड़ी खुद भाई हमर……

हुसि या री तो हा र जा ना ता नी नू हो,

बड़ा करेलू रो ज मन मा नी नू हो…..

मईया के दी हल गो दि या में भी ख बाटे,

राजा नईहर से हमरा मईहर नजदी क बाटे....

होखी न रऊवा नाराज आज दिन बा सूघर,

टेकल जा ई संगे मा थ कृपा बनल रही ऊपर.....

तो हर रहेला सगरो हो उल्टे काम,

बनल रहे प्लान जाये के सासाराम…

ता रा चंडी लेखा यही जो पीठ बाटे,

रा जा नईहर से हमरा मईहर नजदी क बाटे….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।