भला किसी का कर ना सको तो

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॥ पावन पाठ ॥

भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का ना करना ।

पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, कांटे बन कर मत रहना ॥

बन ना सको भगवान् अगर, कम से कम इंसान बनो ।

नहीं कभी शैतान बनो, नहीं कभी हैवान बनो ॥

सदाचार अपना न सको तो, पापों में पग ना धरना ।

पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, कांटे बन कर मत रहना ॥

सत्य वचन ना बोल सको तो, झूठ कभी भी मत बोलो ।

मौन रहो तो ही अच्छा, कम से कम विष ना घोलो ॥

बोलो यदि पहले तुम तोलो, फिर मुंह को खोला करना ।

पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, कांटे बन कर मत रहना ॥

घर ना किसी का बसा सको तो, झोपड़ियां ना जला देना ।

मरहम पट्टी कर ना सको तो, खार नमक ना लगा देना ॥

दीपक बन कर जल ना सको तो, अंधियारा ना फैला देना ।

पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, कांटे बन कर मत रहना ॥

अमृत पिला ना सके किसी को, ज़हर पिलाते भी डरना

धीरज बंधा नहीं सको तो घाव किसी के मत करना ॥

राम नाम की माला ले क,र सुबह श्याम भजन करना ।

पुष्प नहीं बन सकते तो तुम, कांटे बन कर मत रहना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।