सिया जी को ढूंढत राम फिरे

संत तुलसीदास
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सिया जी को ढूंढत राम फिरे,

बन बन राम फिरे....

आगे आगे रामा पीछे पीछे लक्ष्मण,

तपसी भेष धरें सिया जी को ढूंढत राम फिरे....

नंगे पांव फिरत है बन में,

व्याकुल होते फिरें सिया जी को ढूंढत राम फिरें.....

हरे हरे वृक्ष और बन के वासी,

पूछा तो राम फिरे सिया जी को ढूंढत राम फिरें.....

तुमने देखी है सिया जानकी,

को ले गयो हरके सिया जी को ढूंढत राम फिरे....

आगे बैठे गीध जटायु,

वो बैठे-बैठे भजन करें सिया जी को ढूंढत राम फिरे....

सारी कथा श्री राम को सुनाई,

ले गया असुर हर के सिया जी को ढूंढत राम फिरे....

वृद्धा अवस्था मेरी रघुवर,

नए-नए पंख झड़े सिया जी को ढूंढत राम फिरे....

तुलसीदास आश रघुवर की,

जल बैकुंठ भरे सिया जी को ढूंढत राम फिरे .....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।