तेरा नाम जपूं नवरातों में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय माँ जय माँ जय माँ जय जय माँ,

तेरा नाम जपूं नवरातों में रातों में नवरातों में,

तेरी सूरत बस गई आँखों में आँखों में माँ आँखों में……

तेरी ममता का कोई मोल नही है,

हाँ मोल नही है मैया मोल नही है,

तेरी सूरत बस गई आँखों में आँखों में माँ आँखों में,

तेरा नाम जपूं नवरातों में रातों में नवरातों में…….

सिर सोने का छत्तर विराजे गल वैजन्ती माला साजे,

तेरा नाम लिखा इन साँसो में साँसो में मैया साँसो में,

तेरा नाम जपूं नवरातों में रातों में नवरातों में…….

चन्दन की चौकी बनाई आस की मैंने ज्योत जलाई,

तेरी सूरत बस गई आँखों में आँखों में माँ आँखों में,

तेरा नाम जपूं नवरातों में रातों में नवरातों में…….

पांच मेवे का थाल सजाया,

थाल सजाया मैया थाल सजाया,

तेरा भोग लगाऊँ नवरातों में रातों में नवरातों में,

तेरा नाम जपूं नवरातों में रातों में नवरातों में…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।