सारे जग की महारानी हो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सारे जग की महारानी हो,

जगदम्बे शेरावाली हो,

चाहो तो सूखी बगिया में,

तुम कर देती खुशहाली हो.....

दुख जीवन के हैं जो सारे,

पलभर में दूर भगाती हो,

जन्मों जन्मों से सोई हुई,

किस्मत के भाग्य जगाती हो,

निर्धन हो या हो रंक कोई,

करती सबकी रखवाली हो......

मेरी मैया है फूल बहारों का,

मेरी मैया है नूर नज़ारों का,

मेरी मैया के जैसी कोई मैया नहीं,

बिना इसके कहीं भी मुझे रहना नहीं,

जैसे है चाँद सितारों में,

मेरी मैया है एक हज़ारों में,

हम जैसे भोले-भालों की,

ये मैया तो है जगवालों की,

ये मैया तो है जगवालों की…..

कलयुग में माँ का नाम चले,

सारी दुनिया को तारे है,

पापी भी माँ का नाम जपे,

बन जाते माँ के प्यारे हैं,

जग जननी करुणामयी अम्बे,

संकट को मिटाने वाली हो…..

हम भी हैं तुम्हारे ही बच्चे,

पग पग पर दिया सहारा है,

जीबन भी हवाले है तेरे,

सब कुछ तुम ही पे वारा है ,

चरणों मे तेरे आ बैठे,

भक्तो की सुनने वाली हो……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।