तेरे दर को में छोड कहा जाओ

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर को में,तेरे दर को में माँ,

तेरे दर को में छोड कहा जाओ माँ,

दूजा कोई द्वार न दिखे,

अपना में दुखडा किस्से जा के सुनाओ ॥

माँ दूजा कोई द्वार न दिखे

तेरे दर को में छोड कहा जाओ माँ,

दूजा कोई द्वार न दिखे,

इक आश मुझे तुमसे है मैया ॥

टूटे कही न विश्वास मेरा मैया ॥

इक आश मुझे तुमसे है मैया॥

टूटे कही न विश्वास मेरा मैया

तेरे सिवा कहा माँ में झोली कहा फेहलू,

माँ दूजा कोई द्वार न दिखे........

तेरे आगे मैने दमन पसरा है॥

मुझको ये मैया तेरा ही सहारा है॥

तेरे आगे मैने दमन पसरा है

मुझको ये मैया तेरा ही सहारा है

कहा जाओ जहा जाके कुछ पाउ

माँ दूजा कोई द्वार न दिखे..........

लक्खा आया मैया बन के सवाली है॥

तेरे दर से गया न कोई ख़ाली है॥

लक्खा आया मैया बन के सवाली है,

सवाली है सवाली है सवाली है,

लक्खा आया मैया बन के सवाली है,

तेरे दर से गया न कोई ख़ाली है,

कैसे गीत में निराश होंगे जाओ माँ,

दूजा कोई द्वार न दिखे,

तेरे दर को में छोड़े कहा जाओ माँ,

दूजा कोई द्वार न दिखे........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।