कोई कहे जगदम्बे कोई कहे ज्वाला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कोई कहे जगदम्बे कोई कहे ज्वाला,

मै तो कहूं माँ का हर रूप है निराला……

कोई कहे चंडी माता तो कोई मनसा रानी,

मैं तो कहूँ माँ का हर नाम मतवाला,

हो मै तो कहूं माँ का हर रूप है निराला……

कोई खे कालका तो कोई काल रात्रि,

मैं तो कहूँ माँ ने हर संकट है टाला,

हो मै तो कहूं माँ का हर रूप है निराला…

कोई कहे शीतल तो कोई कहे शारदे,

मैं तो कहूँ नाम माँ का सुख देने वाला,

हो मै तो कहूं माँ का हर रूप है निराला……

कोई कहे शाहकुंबरी कोई महाकाली,

बैरागी कहे माँ ने सबको ही पाला,

हो मै तो कहूं माँ का हर रूप है निराला…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।