दुखड़ा माँ जीरा नेडे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुन साडा दुखड़ा माँ ज़रा नेडे होके ॥

तैनू वासते पावां , हाल दिल दा सुनावा ॥

मैं तां रखीयां न , तेरे तो लुकोके , सुन साडा दुखड़ा माँ ॥

सुन लईये लोकां , दीयां माऐ चुप करके ॥

भावे आप रोईये माऐ , नित अखां भरके ॥

लोकी देदे ने ताने , की आपने वेगाने ॥

भाग जागे नईयो , अम्मीए नी मेरे सौ के , सुन साडा दुखड़ा माँ ॥

न हक मारीया न बुरा , कदे मांगीया ॥

नित दिया चेडीया , सुल्ली सानु टंगीया ॥

कोई चलदा न , चारा इक तु ही सहारा ॥

गल तु वी न लावे , डिग्गे चरणी रोके , सुन साडा दुखड़ा माँ ॥

कर मंजुर अज , मेरी सुनवाई माँ ॥

' साहिल ' है देदा , तेरे दर ते दुहाई माँ ॥

मेरी बेडी बन्ने ला दे , मेरे दुखडे मिटा दे ॥

थक्क गये हां माए , हुण दुख टो - टो के , सुन साडा दुखडा माँ ॥

Singer :- kumar - Sanjeev

contact :- 098141 - 62145

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।