शेर की सवारी करके

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया सुरमा लगाया करो,

शेर की सवारी करके,

पर्वत घूम आया करो……

मैया पायल भी पहना करो,

मैया बिछुए भी पहना करो,

मैया महावर बिन शोभा नही,

जाके सोलह सिंगर करो,

शेर की सवारी करके,

पर्वत घूम आया करो……

मैया लहंगा भी पहना करो,

मैया साड़ी भी पहना करो,

मैया चुनरी बिन शोभा नही,

जाके सोलह सिंगर करो,

शेर की सवारी करके,

पर्वत घूम आया करो……..

मैया चूड़ी भी पहना करो,

मैया कंगना भी पहना करो,

मैया मेहँदी बिन शोभा नही,

जाके सोलह सिंगर करो,

शेर की सवारी करके,

पर्वत घूम आया करो……..

मैया हार भी पहना करो,

मैया माला भी पहना करो,

मैया कुंडल बिन शोभा नही,

जाके सोलह सिंगर करो,

शेर की सवारी करके,

पर्वत घूम आया करो……..

मैया नथनी भी पहना करो,

मैया टीका भी पहना करो,

मैया सिंदूर बिन शोभा नही,

जाके सोलह सिंगर करो,

शेर की सवारी करके,

पर्वत घूम आया करो……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।