मैं कैसे दर्शन पाऊं तेरा शेर खड़ा रस्ते में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं कैसे दर्शन पाऊं,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में…

हम बड़ी दूर से आए,

जल भर भर लोटा लाये,

मैया चरण मैं कैसे धुलाऊँ,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में,

मैं कैसे दर्शन पाऊं,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में.....

हम बड़ी दूर से आए,

और दीया बाती लाए,

मैया ज्योत मैं कैसे जलाऊँ,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में,

मैं कैसे दर्शन पाऊं,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में…

हम बड़ी दूर से आए,

चंदन और रोली लाए,

मैया तिलक मैं कैसे लगाऊँ,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में,

मैं कैसे दर्शन पाऊं,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में…..

हम बड़ी दूर से आए,

लहंगा और चुनरी लाए,

मैया चुनर मैं कैसे ओढाऊँ,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में,

मैं कैसे दर्शन पाऊं,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में……

हम बड़ी दूर से आए,

हलवा और पूरी लाए,

मैया भोग मैं कैसे लगाऊँ,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में,

मैं कैसे दर्शन पाऊं,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में…..

हम बड़ी दूर से आए,

ढोलक और चिमटा लाए,

हम बड़ी दूर से आए,

भगतो को संग में लाए,

मैया भजन मैं कैसे सुनाऊँ,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में,

मैं कैसे दर्शन पाऊं,

तेरा शेर खड़ा रस्ते में....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।