मन वृन्दावन बनाया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़:- मुझे वृन्दावन बसाया, ये कृपा नहीं तो क्या है

मन वृन्दावन बनाया, इसमें तुझे बिठाया,

ये भजन नहीं तो क्या है,

मन वृन्दावन बनाया....

ह्रदय आसन्न को सजा के, उसपे तुझे बिठा के,

मन मन्दिंर है बनाया, इसमें तुझे बिठाया,

ये भजन नहीं तो क्या है,

मन वृन्दावन बनाया....

दुनिया से दिल हटा के, तुझमें ही मन लगा के,

सासों में है समाया, ये भजन नहीं तो क्या है,

मन वृन्दावन बनाया....

गुरूवर ने भर दिया है, नाम रस से मन का प्याला,

धसका को पागल बना के, विषियों से मन हटा के,

ये भजन नहीं तो क्या है,

मन वृन्दावन बनाया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।