नंगे नंगे पावं चल आ गया री माँ एक तेरा पुजारी

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नंगे नंगे पावं चल आ गया री माँ,

एक तेरा पुजारी...

हाथो में ले गंगा जल गागर,

श्रद्धा से स्नान करा गया री माँ,

एक तेरा पुजारी….

लाल लाल चोला किनारी गोटे वाला,

लाल लाल चुनरी ओड़ा गया री माँ,

एक तेरा पुजारी….

चांदी की कटोरी में केसर घोल के,

माथे पे तिलक गया री माँ,

एक तेरा पुजारी….

चंपा चमेली गुलाब जूही गेंदा,

पुष्पों की माला पहना गया री माँ,

एक तेरा पुजारी….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।