महाकाली आरी रे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महाकाली आरी रे ...... ओ काली केश विकराल,

हाथ में कटारी रे ओ डट रे संकट थोड़ी देर,

महाकाली आरी रे....

जब तक माँ मेरे साथ में तू कुछ न बिगाड़ पायेगा,

मेरे पीछे जोर जमावे उसके आगे हार जायेगा,

खप्पर धारी रे डट रे संकट.......

जो शक्ति से अनजान तू , थने महिमा आज बताऊ मैं,

शुम्भ निशुम्भ मारन वाली, महाकाली से मिलवाउ मैं,

रक्त पीवणनारी रे डट रे संकट.......

माँ राक्षश ने संगार के पहने मुंडो की माला रे,

जब लगे ललकार हे उसकी लगे जुबा पर ताला रे,

क्रोध में आरी रे ओ डट संकट.......

महाकाली की बड़ी लाडली, महिमा करिश्मा गावे है,

तेरा धर्म भगत भी कहता तेरे बिना रहा न जावे है,

मिलण आरी रे ओ डट संकट.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।