जगराता मेरी माई दा

मास्टर सलीम
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अज्ज नी किसे ने सोना,

जगराता मेरी माई दा,

माँ नू सारी रात ध्योना,

जगराता मेरी माई दा,

अज्ज नी किसे ने....

संगत जेहड़ी बाहर है फिरदी,

छेती अंदर आओ,

गुट्टा उत्ते बन्नो मोलिया,

मथे तिलक सजाओ,

पहला गणपत आज मनाउना,

अज्ज नी किसे ने सोना,

जगराता मेरी माई दा.....

सोहना सुंदर भवन सजाया,

विच है मूरत लायी,

पिले शेर दी करके सवारी,

बैठी भोली माई,

उत्तो फुला दा हार भी पाउना,

अज्ज नी किसे ने सोना,

जगराता मेरी माई दा.....

ढंडया दे संदीप ने लिख्या,

हाल जो अखी दिखया,

उसनु दर्शन होंनगे जिसने ,

सबर किता है मीठा,

गुणगान है रल मिल गाउना,

अज्ज नी किसे ने सोना,

जगराता मेरी माई दा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।