माँ तू इतना ना करियो श्रृंगार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी शेरावली माँ तू इतना ना करियो श्रृंगार,

नज़र तोहे लग जाएगी....

तेरे टीके पे मन मेरा अटका,

प्यारा लगे तेरे कानो का झुमका,

तेरे लम्बे लम्बे बाल,

तू इतना ना....

तेरी नथनियाँ पे मन मेरा अटका,

प्यारा लगे तेरे गले का हरवा,

तेरी प्यारी सी मुस्कान,

तू इतना ना....

तेरी चूड़ियों पे मन मेरा अटका,

प्यारा लगे तेरे हाथों का कंगना,

तेरी मेहँदी रची है लाल- लाल,

तू इतना ना....

तेरी तगड़ी पे मन मेरा अटका,

प्यारा लगे तेरे कमर का गुचा,

तू कर सोलह श्रृंगार,

तू इतना ना....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।