सातो बहिनिया अईली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय शेरावाली माँ,

जय जय जोतावाली माँ,

जय जय शेरावाली माँ,

जय जय जोतावाली माँ,

सातो रे बहिनिया अईली कस के स्नानवा,

बईठली सिंगार करे तस ले परल ध्यानवा....

जय जय शेरावाली माँ,

जय जय जोतावाली माँ....

हां.. सातो रे बहिनिया अईली कस के स्नानवा,

बईठली सिंगार करे तस ले परल ध्यानवा,

लागल भैरो भईया के फिकिरवा हो फिकिरवा,

अरे नाक के नथुनिया खोजी लाउ रे मलिनिया…..

गिरल बाटे गंगा जी के तीरवा,

नाक के नथुनिया खोजी लाउ रे मलिनिया,

गिरल बाटे गंगा जी के तीरवा……

मने मने मईया निराश बाड़ी हो,

बईठल भैरो के पास बाड़ी हो....

के खोजी लाई मोरा सोना के नथियावा,

जोहत सेवकन के आस बाड़ी हो,

मने मने मईया निराश बाड़ी हो,

बईठल भैरो के पास बाड़ी हो…

के खोजी लाई मोरा सोना के नथियावा,

जोहत सेवकन के आस बाड़ी हो,

मोतिया मोढ़ावल बाटे हिरवा अरे हिरवा,

नाक के नथुनिया खोजी लाउ रे मलिनिया…..

गिरल बाटे गंगा जी के तीरवा,

नाक के नथुनिया खोजी लाउ रे मलिनिया,

गिरल बाटे गंगा जी के तीरवा...

पुजवा के बेर भईल देर होता जी,

धरे खातिर कलशा कुबेर होता जी,

अरुण बिहारी पवन पूजे खातिर पउवा....

बईठल बईठल गदबेर होता जी,

पुजवा के बेर भईल देर होता जी,

धरे खातिर कलशा कुबेर होता जी,

अरुण बिहारी पवन पूजे खातिर पउवा….

बईठल बईठल गदबेर होता जी,

छोटुवो धरवले माई के धीरवा मन में धीरवा,

नाक के नथुनिया खोजी लाउ रे मलिनिया…..

गिरल बाटे गंगा जी के तीरवा,

नाक के नथुनिया खोजी लाउ रे मलिनिया,

गिरल बाटे गंगा जी के तीरवा………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।