हे कालरात्री कल्याणी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे कालरात्रि कल्याणी,

हम द्वारे तुम्हारे आए हैं.....

है कालरात्रि कल्याणी,

माँ दुर्गे कल्याण करो,

इस जन्म मरन के बंधन से,

माँ मुक्त करो, माँ मुक्त करो,

इस दास की मैया लाज रखो,

हरो दोश जो सर पे आए हैं,

हे कालरात्रि कल्याणी,

हम द्वारे तुम्हारे आए हैं.....

जय दुर्गा जय अष्ट भवानी माँ,

तेरे दर आया तेरा सवाली माँ,

मुझे मुक्त करो संकट से,

लाया संग झोली खाली माँ,

करुणा बरसाव माँ मेरी,

तुमको मैं मनने आया हुं,

हे कालरात्रि कल्याणी,

हम द्वारे तुम्हारे आए हैं.....

तुम अम्बे चंडी काली माँ,

करो भक्तों की रखवाली माँ,

जो तुम ना सुनो तो सुने कौन,

करो कृपा शेरोवाली माँ,

मेरे प्राण तुम्हे अर्पण मैया,

तेरी ज्योत जगने आया हुं,

हे कालरात्रि कल्याणी,

हम द्वारे तुम्हारे आए हैं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।