कभी तो तस्वीर से निकलोगी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया तेरी तस्वीर सिरहाने रखकर सोते हैं,

यही सोच हम अपने दोनों नैन भिगोते हैं,

कभी तो तस्वीर से निकलोगी, कभी तो मेरी मईया पिघलोगी....

जाने कब आ जाओगी , मैं आँगन रोज बुहारता ,

मेरे इस छोटे से घर का कोना कोना सँवारता,

मेरी माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली,

जिस दिन माँ नहीं आती हम जी भर कर रोते हैं,

यही सोच हम अपने दोनों नैन भिगोते हैं,

कभी तो तस्वीर से निकलोगी, कभी तो मेरी मईया पिघलोगी….

अपनापन हो अँखियों में, होठों पे मुस्कान हो,

ऐसे मिलना जैसे की माँ, जन्मों की पहचान हो,

मेरी माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली,

आपके खातिर अँखियाँ मसल मसल कर रोते हैं,

यही सोच हम अपने दोनों नैन भिगोते हैं,

कभी तो तस्वीर से निकलोगी, कभी तो मेरी मईया पिघलोगी....

इक दिन ऐसी नींद खुले, जब माँ का दीदार हो,

बनवारी फिर हो जाए, ये अँखियाँ बेकार हो,

मेरी माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली,

बस इस दिन के खातिर हम तो दिन भर रोते हैं,

यही सोच हम अपने दोनों नैन भिगोते हैं,

कभी तो तस्वीर से निकलोगी, कभी तो मेरी मईया पिघलोगी…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।