माता रानी ने मुझे बुलाया हैं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दर्द बेटे का आँचल में छुपा लेती हैं,

याद करे ना करे बेटा माँ बुला लेती हैं,

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं,

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं,

ये पहाड़ी से संदेश आया हैं,

अब नसीबा मेरा जगमगाया हैं,

अब नसीबा मेरा जगमगाया हैं,

ये पहाड़ी से संदेश आया हैं,

जय हो जय हो शेरावालिये,

जय हो जय हो ज्योतावालीये,

जय हो जय हो शेरावालिये,

जय हो जय हो ज्योतावालीये....

बेटे की पीर को माँ ही तो जाने,

और भला कोई क्या जाने,

बारिश की बूंदो मैं आखियों के नीर को,

बेहते हुए माँ ही पहचाने,

बेटे का दुःख हरने को,

खाली झोली भरने को,

माँ ने दरबार लगाया है,

जय माता दी

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं,

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं.....

कुछ मांग ना माँ से,

बेटे की आदत हैं,

माँ बिन मांगे ही देती हैं,

बेटे की भूल को पल में भुलाती हैं,

माँ माफ़ी ही देती हैं,

बेटे को गिरने ना दिया,

आकर माँ ने थाम लिया,

और गले भी लगाया हैं,

जय माता दी

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं,

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं....

जय हो जय हो शेरावालिये,

जय हो जय हो ज्योतावालीये,

जय हो जय हो शेरावालिये,

जय हो जय हो ज्योतावालीये...

ऊँची पहाड़ी पे जगमग वो ज्योति हैं,

माता वही तो होती हैं,

बिन चाँद तारों को सारे नजारों को,

वही उजियारा देती हैं,

माँ ने अपनी क्षमता से,

माँ ने अपनी ममता से,

ये संसार रचाया हैं,

जय माता दी

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं,

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं,

ये पहाड़ी से संदेश आया हैं,

अब नसीबा मेरा जगमगाया हैं,

अब नसीबा मेरा जगमगाया हैं,

ये पहाड़ी से संदेश आया हैं,

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं,

माता रानी ने मुझे बुलाया हैं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।