जगदम्बिके माँ काली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगदम्बिके..

जगदम्बिके माँ काली,

जगदम्बिके माँ काली,

कपाली खड्ग खप्पर गले,

मुंड माल धारिणी,

जगदम्बिके माँ काली,

जगदम्बिके.....

शुम्भ निशुम्भ संहारिणी,

शुम्भ निशुम्भ संहारिणी,

शुम्भ निशुम्भ संहारिणी,

महिषासुरमर्दिनी

असुरनसंहारिणी पालिनी,

“सरसरंग” रूप धारिणी माँ काली,

जगदम्बिके.....

असुरनसंहारिणी पालिनी,

“सरसरंग” रूप धारिणी माँ काली,

जगदम्बिके माँ काली,

जगदम्बिके माँ काली,

कपाली खड्गवाली,

जगदम्बिके माँ काली,

माँ काली कपाली खड्गवाली,

जगदम्बिके माँ काली,

जगदम्बिके.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।