आज तो कैलाश में बाज रहे डमरू

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे घुंघरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे डमरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे घुंघरू……..

शंकर भी नाचे, गौरा भी नाचे,

गनपत भी नाचे, स्वामी कार्तिक भी नाचे,

शंकर भी नाचे, गौरा भी नाचे,

गनपत भी नाचे, स्वामी कार्तिक भी नाचे,

भूत, प्रेत, नंदीगन संग सारा ही कैलाश नाचे,

पावँ में बाज रहे सोने के घुँघरू....

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे घुंघरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे डमरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे घुंघरू....

ब्रह्मा जी आये संग सरस्वती को लाये,

विष्णु जी आये संग लक्ष्मी को लाये,

वीणा बजाते हुए, नारद जी आये,

पावँ में बाज रहे सोने के घुँघरू……

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे घुंघरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे डमरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे घुंघरू....

ब्रह्मा जी शिव जी की आरती उतारे,

विष्णु जी शिव जी को माला पहनाये,

ब्रह्मा जी शिव जी की आरती उतारे,

विष्णु जी शिव जी को माला पहनाये,

नाच नाच नारद जी वीणा बजाये,

नाच नाच नारद जी वीणा बजाये,

पावँ में बाज रहे सोने के घुँघरू....

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

आज तो कैलाश मे बाज रहे डमरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे घुंघरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे डमरू,

नाच रहे भोलेबाबा, बाज रहे घुंघरू....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।