दुनिया से मोह भंग हुआ है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया से मोह भंग हुआ है,

जब से मन तेरे संग लगा है,

दुनिया से मोह भंग हुआ है,

जब से मन तेरे संग लगा है…..

भूल गया हूँ दुनियादारी तुमको पाके,

अब और कही ना जाउ तेरे दर पे आके,

क्यों रूठे हो भोले हमको ये तो बताना,

दुनिया से मोह भंग हुआ है,

जब से मन तेरे संग हुआ है…

देखा है हमने हर एक नजारा,

पर देखा ना कुछ तुमसे प्यारा,

दूजा रंग चढ़े ना मुझपे,

जबसे तेरा रंग चढ़ा है,

दुनिया से मोह भंग हुआ है,

जब से मन तेरे संग हुआ है…

दर्शन से तेरे मन खिल जाता,

भक्त मनचाहा फल है पाता,

तेरी भक्ति का तो उमंग जगा है,

दुनिया से मोह भंग हुआ है,

जब से मन तेरे संग लगा है…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।