माधव मदन मुरारी सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जमुना तेरे समीर,

थोडी मंद मंद चले,

बृज के राज में भी सुगंधी,

मेरे गोविंद की मील,

नटखट नटवर नगर नंद लाल,

अरे मुरलीधर कान्हा सांवरे,

हे गोपाल...

नंदनवन मे कृष्ण मुरारी,

आज भी नर्तन करें,

वृंदावन के नर नारी,

रालमिल संकीर्तन करें,

सोहे मोर मुकुट मथे,

कांठे वैजंती माला,

हे बंसीधर मोहक सलोन,

हे गोपाल....

लीलाधारी रसबिहारी की,

महक कण-कण में,

गोपी जनवल्लभ त्रिपुरारी हरि,

एक एक मन में,

श्याम श्याम रंग में,

सारा गोकुल रंग दल,

माधव मदन मुरारी सांवरे,

हे गोपाल....

वेणु बजैया धेनु छैय्या,

नागर नंद किशोर,

नच नचैया रास रचैया,

मनोहरा चितचोर..

नटखट नटवर नगर नंद लाल,

अरे मुरलीधर कान्हा सांवरे,

हे गोपाल,

हे बंसीधर मोहक सलोन,

हे गोपाल,

माधव मदन मुरारी सांवरे,

हे गोपाल...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।