वंदन है माँ भारती

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॥ पावन पाठ ॥

भारत माँ की जय हो भारत माँ की जय हो...

वंदन है माँ भारती धन्य धन्य माँ भारती,

देव- मुनि- जन मिलकर सारे रोज करें तेरी आरती,

धरती नही ये माँ है हम सबकी ये जांन है,

इसकी सदा ही जय हो इसकी सदा ही जय हो,

भारत माँ की जय हो.......

इतिहास के पन्नो पर गौरव गाथा इसकी है,

इस जैसी पावन भूमि और कहो जरा किसकी है,

ऋषियों की ये धरा है, त्याग यहा पे भरा है,

इसकी सदा ही जय हो इसकी सदा ही जय हो,

भारत माँ की जय हो.....…

धरती है ये वीर शिवा की राणा जैसे वीरों की,

धर्म पे शीश लूटाने वाले वीरो की रणधीरों की,

ये प्रेम नही तो क्या है वीरो का रक्त बहा है,

इसकी सदा ही जय हो,

भारत माँ की जय हो.....

लाखो वीरो ने देश पर दी अपनी कुर्बानी है,

जो देश के काम न आये खून नही वो पानी है,

आओ हम मिल जाये सब इसका वंदन गायें,

इसकी सदा ही जय हो,

भारत माँ की जय हो.......

रचियता डॉ गौतम कुमार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।