रंग बरसे माँ के द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

करलो माँ की जय जयकार.....

रंग बरसे माँ के द्वार, करलो माँ की जय जयकार....

हो जब अम्बे का जगराता, जो माँगो वो ही दे माता,

दुनियाँ के रिश्ते झूठे है, बस सच्चा इसका ही नाता,

आये नवरात्रे माँ के, भक्तो पे छाई बहार

रंग बरसे माँ के द्वार, करलो माँ की जय जयकार.....

मेरी माँ का भवन बड़ा प्यारा है, यहाँ सुन्दर हर एक नजारा है,

आये है देवता स्वर्ग छोड़, बोला ऊँचा जयकारा है,

सारे बच्चो पर माता,

बिखराये ममता और प्यार,

रंग बरसे माँ के द्वार, करलो माँ की जय जयकार.....

भक्तो के संकट हर लेती, माँ खाली झोली भर लेती,

जो श्रद्धा से विश्वास करे, मईया उसकी नईया खेती,

सुख से बीते ये जीवन,

वो ना डूबे है मझधार

रंग बरसे माँ के द्वार, करलो माँ की जय जयकार.....

आओ माँ का सम्मान करो, मिलके उसका गुणगान करो,

84 भी कट जायेगे, बस प्रेम उसका ध्यान करो,

करता है भूलन त्यागी,

माँ जगदम्बे का प्रचार,

रंग बरसे माँ के द्वार, करलो माँ की जय जयकार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।