आरती श्री साईं गुरुवर की

पारंपरिक
हनुमान जी आरती साईं भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

धुन-आरती कीजै हनुमान लल्ला की

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ll

जा के कृपा विपुल सुखकारी, दुःख शोक संकट भयहारी l

शिर्डी में अवतार रचाया, चमत्कार से तत्व दिखाया l

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की l

कितने भक्त शरण में आए, वे सुख़ शांति चिरंतन पाए l

भाव धरे जो मन में जैसा, साईं का अनुभव हो वैसा l

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की l

गुरु की उदी लगावे तन को, समाधान लाभत उस तन को l

साईं नाम सदा जो गावे, सो फ़ल जग में शाश्वत पावे l

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की l

गुरुवार करे पूजा सेवा, उस पर कृपा करत गुरु देवा l

राम कृष्ण हनुमान रूप में, दे दर्शन जानत जो मन में l

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की l

विविध धर्म के सेवक आते, दर्शन कर इच्छित फ़ल पाते l

जय बोलो साईं बाबा की, जय बोलो अवधूत गुरु की l

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की l

साईं की आरती जो कोई गावे, घर में बसी सुख़ मंगल पावे ll

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ll

अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक, राजा धिराज योगी राज ,

श्री सच्चिदानंद सदगुरु साईं नाथ महाराज की जय l

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।