रंग भरा है जी फूलों में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रंग भरा है जी फूलों में,

मैया मेरी झूल रही,

सोने चांदी के झूलों में....

आई खुशबु बहारों में,

कंचकों संग खेल रही,

मेरी मैया पहाड़ों में,

रंग भरा है जी फूलों में,

मैया मेरी झूल रही.....

पता पत्ता है जी झूम रहा,

कण कण धरती का

माँ के चरणों को चूम रहा,

रंग भरा है जी फूलों में,

मैया मेरी झूल रही.....

पत्ता पत्ता है जी हरष रहा,

मैया जी से मिलने को,

बच्चा बच्चा है तरस रहा,

रंग भरा है जी फूलों में,

मैया मेरी झूल रही....

असा फिर भी आवेंगे,

पान सुपारी नारियल,

माँ को भेंट चढांवेंगे,

रंग भरा है जी फूलों में,

मैया मेरी झूल रही.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।