जय जय काली माँ खप्परवाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय काली माँ खप्परवाली,

तेरी अँखियाँ लाल लाल हैं,

तेरे गले मुण्डों की माल है....

तूने कहा था मैया बागों में आऊँगी,

में आयी तुम ना आयी,

मेरे प्यासे नैना तरसे,

तू निकली ना घर से,

जय जय काली माँ खप्परवाली,

तेरी अँखियाँ लाल लाल हैं,

तेरे गले मुण्डों की माल है……..

तूने कहा था मैया तालों में आऊँगी,

में आयी तुम ना आयी,

मेरे प्यासे नैना तरसे,

तू निकली ना घर से,

जय जय काली माँ खप्परवाली,

तेरी अँखियाँ लाल लाल हैं,

तेरे गले मुण्डों की माल है……

तूने कहा था मैया कोहलों में आऊँगी,

में आयी तुम ना आयी,

मेरे प्यासे नैना तरसे,

तू निकली ना घर से,

जय जय काली माँ खप्परवाली,

तेरी अँखियाँ लाल लाल हैं,

तेरे गले मुण्डों की माल है….

तूने कहा था मैया मंदिर में आऊँगी,

में आयी तुम ना आयी,

मेरे प्यासे नैना तरसे,

तू निकली ना घर से,

जय जय काली माँ खप्परवाली,

तेरी अँखियाँ लाल लाल हैं,

तेरे गले मुण्डों की माल है….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।