मेरे हाथों पे खींच दे लकीर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे हाथों पे खींच दे लकीर ऐसी माँ

सोयी सोयी जग दे तक़दीर ऐसी माँ,

चढ़ाऊँ भोग में हलवा पूरी चना खीर मेरी माँ,

मेरे हाथों पे खींच दे लकीर ऐसी माँ.....

पौड़ी पौड़ी मैं है माता दी बोलदी रवाँ,

आगे पीछे मैयाजी तेरे डोलदी रवाँ,

जो तू काटे दुखों वाली,

कोई ज़ंजीर मेरी माँ

मेरे हाथों पे खींच दे लकीर ऐसी माँ.....

शेरावाली माँ मेरी फ़रियाद सुनले,

ज्योतावाली माँ मेरी फ़रियाद सुनले

तेरा दर्शन दिखा तू,

बड़ा जागीर मेरी माँ,

मेरे हाथों पे खींच दे लकीर ऐसी माँ.....

सिवा तेरे हमारा कोई और नहीं माँ,

तेरा द्वारा सहारा बस एक मेरी मेरी माँ,

ये सारे भक्त शरण तेरी,

निभाते प्रीत मेरी माँ,

मेरे हाथों पे खींच दे लकीर ऐसी माँ.....

मेरे हाथों पे खींच दे लकीर ऐसी माँ,

सोयी सोयी जग दे तक़दीर ऐसी माँ,

चढ़ाऊँ भोग में हलवा पूरी चना खीर मेरी माँ,

मेरे हाथों पे खींच दे लकीर ऐसी माँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।