मन्ने चरणों का दास बना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मन्ने चरणो का दास बना ले री,

हे री चुनरी के ओढ़ण वाली,

मन्ने चरणों का दास बना ले री,

हे री चुनरी के ओढ़ण वाली.....

गहरी नदिया नाँव पुरानी,

केवट इसका है नादानी,

परले पार लगादे री,

हरी चुनरी के ओढ़ण वाली,

मन्ने चरणों का दास बना ले री,

हे री चुनरी के ओढ़ण वाली…..

सर पे है ये गठरी भारी,

चलत चलत घिर आई अंधियारी,

पैरों में पड़ गए छाले री हे री,

हरी चुनरी के ओढ़ण वाली,

मन्ने चरणों का दास बना ले री,

हे री चुनरी के ओढ़ण वाली…..

ठंडी ठंडी हवा चलत है,

भगत तेरा उसमें डोलत है,

आँचल बीच छुपा ले री,

हरी चुनरी के ओढ़ण वाली,

मन्ने चरणों का दास बना ले री,

हे री चुनरी के ओढ़ण वाली…..

मेरी मैया का यही पता है,

जम्मू में तेरा भवन बना है,

खुले खुले दर्शन दे दे री हे री,

हरी चुनरी के ओढ़न वाली,

मन्ने चरणों का दास बना ले री,

हे री चुनरी के ओढ़ण वाली……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।