हनुमत सा बाबोसा का मुखड़ा

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - हंसता हुआ नूरानी चेहरा...

रूप है जिनका हनुमत जैसा,

देव न कलयुग में कोई ऐसा,

जिनके रूप में बैठी बाईसा,

बाबोसा... बाबोसा.....,

प्यारा सा बाबोसा का मुखड़ा ,

ऐसे लागे ज्यो चांद का टुकड़ा,

भक्तो के मन भाये बाबोसा,

बाबोसा... बाबोसा.....

सूरज सा तेज मुख पे बरस रहा नूर है,

चुरू वाले बाबोसा जग में मशहुर है,

कोई माने या ना माने,

हम तो बस है इनके दीवाने,

सब कुछ मिला और मांगू क्या,

रूप है जिनका.....

बाबोसा मतवाले, इनका दीदार कर,

दिल मे बसाले, बाबोसा का ध्यान धर,

तन में मन मे इस जीवन मे,

दिलबर तू ही धरती गगन में,

विभु को भक्ति से सब मिला

रूप है जिनका.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।