लांगुरिया मोहे ले चल करौली मेला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लांगुरिया मोहे ले चल करौली मेला,

करौली मेला करौली मेला,

लांगुरिया मोहे ले चल करौली मेला,

लांगुरिया मोहे ले चल करौली मेला,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला,

ना है धेला ना है धेला,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला…….

कर मत ज्यादा ना कर आना कानी,

दर पर बुलाई रही किला मैया,

कर मत ज्यादा ना कर आना कानी,

दर पर बुलाई रही किला मैया,

लांगुरिया मोहे ले चल करौली मेला,

करौली मेला करौली मेला,

लांगुरिया मोहे ले चल करौली मेला,

महीनो से चल रही पैसो की तंगी,

आने और जाने का खर्चा है जंगी,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला,

ना है धेला ना है धेला,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला…..

ले ले अपने जिगरी से पैसा उधार,

दिखलावे ना तू होशियारी तू होशियारी,

लांगुरिया मोहे ले चल करौली मेला,

लांगुरिया मोहे ले चल करौली मेला,

प्रदीप गाये लिखे अनाडी,

पैसा बिन चोपट है खेती बाड़ी,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला,

जोगन मेरी पॉकेट में ना है धेला…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।