बबुआ के धलिहिं कोरा बलम

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चल घरे माई के दर्शन कइके,

झूठे बइठल बाड़ू एके ज़िद धइके,

बाटे रऊवा से एतने निहोरा बलम,

बबुआ के धलिही कोरा बलम,

जगराता में नाचे दी थोड़ा बलम....

पापा भइया सभे एहिज़ा खाड़ा बा हो,

काहे बुझत नइखु प्रॉब्लम इ त बाड़ा बा हो,

का बताई कि केतना सुकून मिलेला,

माई के भजन प नचला से पुन मिलेला,

जनी चिंता करी एतना मोरा बलम,

बबुआ के धलिही....

तू त घर में घुस जइबु चुप चप जाइके,

मनबु का हमरा के माई से डाँट खियाईके,

यादवराज समर आइ रऊवो नाची,

जनी सोची की कहिये का ममी चाची,

हमरा ख़ुशी में बनी ना रोड़ा बलम,

बबुआ के धलिही....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।