मेरी माई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

धुप समय की लाख सताए,

मुझमे हिम्मत बाकी है,

धुप समय की लाख सताए,

मुझमे हिम्मत बाकी है……

मेरा सर ढकने को माई तेरी चुनर काफी है,

क्या मांगे वो बेटा जिसने माँ की ममता पाई है,

एक तरफ है ये जग सारा एक तरफ मेरी माई है,

क्या मांगे वो बेटा जिसने माँ की ममता पाई है,

एक तरफ है ये जग सारा एक तरफ मेरी माई है……..

जगराता तेरा गाऊं मईया रोज मुझे वो रैन मिले,

तेरे चरण ही मेरी शरण है और कहीं ना चैन मिले,

जगराता तेरा गाऊं मईया रोज मुझे वो रैन मिले,

तेरे चरण ही मेरी शरण है और कहीं ना चैन मिले……

तू ही पुण्य प्रताप है मेरा तू ही कर्म कमाई है,

तू ही पुण्य प्रताप है मेरा तू ही कर्म कमाई है……..

क्या मांगे वो बेटा जिसने माँ की ममता पाई है,

एक तरफ है ये जग सारा एक तरफ मेरी माई है,

क्या मांगे वो बेटा जिसने माँ की ममता पाई है,

एक तरफ है ये जग सारा एक तरफ मेरी माई है…..

कौन डिगाये पथ से उसे जो तुझपे भरोसा कर ले माँ,

भर के पलक मैं तुझे निहारूं तेरी छवि दुख हर ले माँ,

कौन डिगाये पथ से उसे जो तुझपे भरोसा कर ले माँ,

भर के पलक मैं तुझे निहारूं तेरी छवि दुख हर ले माँ…..

दर्द हैं लाखो दुनिया में तू सब दर्दों की दवाई है,

दर्द हैं लाखो दुनिया में तू सब दर्दों की दवाई है……

क्या मांगे वो बेटा जिसने माँ की ममता पाई है,

एक तरफ है ये जग सारा एक तरफ मेरी माई है…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।