रिम झिम सावन बरस रहा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रिम जिम सावन बरस रहा है, द्वार पे तेरे माँ,

कब से खड़ा हुँ आस लगाए, दृश दिखा दे माँ,

दूर करो माँ चिंता मेरी चिंतपूर्णी माँ,

पल पल तुझको याद करूं मैं,

हर क्षण माँ फरियाद करूं मैं,

तुझ सा नहीं है कोई दयालु कृपा कर दे माँ,

दूर करो माँ चिंता मेरी,

रिम जिम सावन…...

मैं दुखियारा गम का मारा,

इस दुनिया से हूं अब हारा,

डोल रही है जीवन नैया पार लगा दे मां,

दूर करो माँ चिंता मेरी,

रिम जिम सावन…..

तुम तो हो माँ दया की सागर,

ये जग तो है दुख की गागर,

तू ही है बस एक सहारा, अपना बना ले मां,

दूर करो माँ चिंता मेरी,

रिम जिम सावन…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।