थोड़ी जही मखनी दे दे नी गवालने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

थोड़ी जही मखनी दे दे नी गवालने, थोड़ी जही मखनी दे दे,

आज मेरा रास्ता छड दे मुरारिया, आज मेरा रास्ता छड दे.....

जाके कहूँगी नंदबाबा से,

तैनू मार पावामा रे मुरारिया तैनू मार पावामा,

थोड़ी जही मखनी....

ओह ता मेरा बाबा लगदा,

मैनु कुछ ना कहन्दा नी गवालने मैनु कुछ ना कहन्दा,

थोड़ी जही मखनी.....

जाके कहूँगी बलदाऊ से,

तैनू मार पावामा रे मुरारिया तैनू मार पावामा,

थोड़ी जही मखनी.....

ओ ता मेरा भाई लगदा,

मैनु कुछ ना कहन्दा नी गवालने मैनु कुछ ना कहन्दा,

थोड़ी जही मखनी.....

जाके कहूँगी नंदरानी से,

तैनू मार पावामा रे मुरारिया तैनू मार पावामा,

थोड़ी जही मखनी....

ओ ता मेरी मैया लगदी,

मैनु कुछ ना केहंदी नी गवालने मैनु कुछ ना केहंदी,

थोड़ी जही मखनी...

जाके कहूँगी राधा रानी से,

तैनू मार पावामा रे मुरारिया तैनू मार पावामा,

थोड़ी जही मखनी.....

ओ ता मेरी जानो प्यारी,

मैनु कुछ ना केहंदी नी गवालने मैनु कुछ ना केहंदी,

थोड़ी जही मखनी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।