मै ता तेरिया रंगा दे विच रंगी आ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भावे चंगी आ भावे मंदी आ,

मै ता तेरिया रंगा दे विच रंगी आ.....

डोल्दी है नैया मेरी दिसदा किनारा नहीं,

तेरे बाजो श्याम मेरा कोई वी सहारा नहीं,

बाह फड़ ले डूब चली आ,

मै ता तेरिया रंगा दे विच रंगी आ.....

सुख देवे दुख देवे झोली विच पावांगी,

तेरे नाल लाइया प्रीता तोड़ निभावांगी,

भावे सुख दे भावे दुख दे,

मै ता तेरिया रंगा दे विच रंगी आ.....

प्रेम नाल लाये बुट्टे कदे वी ना टुटदे,

सत्संग जान वाले कदे वी ना रुकदे,

दिल तोड़ी ना मुख मोड़ी ना,

मै ता तेरिया रंगा दे विच रंगी आ.....

झूठी है दुनिया तेरी मै अजमा लेया,

तैनू छड श्याम मै आवे धोखा खा लेया,

हाथ छोड़ी ना मुख मोड़ी ना,

मै ता तेरिया रंगा दे विच रंगी आ.....

मन बड़ा महला ओ रंग वी ना चढ़दा ,

जद तक श्याम मेरे ते किरपा नहीं करदा,

तन रंग दे मन रंग दे,

मै ता तेरिया रंगा दे विच रंगी आ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।