ज्वाला मैया का दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ज्वाला मैया का दरबार अकबर देखने आया…….

बिन तेल दिया ना बाती,

जहां ज्योत जले दिन दिन रात्रि,

वहाँ पे हो रही जय जयकार, अकबर देखने आया,

ज्वाला मैया का दरबार....

पानी के कुवे खुदवाए,

मंदिर में पानी भरवाए,

ज्योति पानी में लहराए, अकबर देखने आया,

ज्वाला मैया का दरबार....

लोहे के तवे मँगवाए ज्योति के ऊपर लगवाए,

ज्योति निकल गयी सरपार, अकबर देखने आया,

ज्वाला मैया का दरबार....

अकबर को हुई हैरानी मुझे माफ़ करो महारानी,

मैया हम बालक नादान, अकबर देखने आया,

ज्वाला मैया का दरबार....

सोने का छत्तर चढ़ाया मैया का मान बढ़ाया,

वहाँ पे हो रही जय जयकार, अकबर देखने आया,

ज्वाला मैया का दरबार....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।