बीत गई जिंदगानी भजन बिना

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

बीत गई जिंदगानी भजन बिना,

हरि के भजन बिना राम भजन बिना,

बीत गई जिंदगानी भजन बिना....

बाल अवस्था खेल में गवायो,

भोग विलास जवानी भजन बिना,

बीत गई जिंदगानी भजन बिना....

वृद्ध भए तन मोह और माया,

लोग अधिक लिप्त आनी भजन बिना,

बीत गई जिंदगानी भजन बिना....

यह अनमोल रतन धन मानस,

व्यर्थ कियो अभिमानी भजन बिना,

बीत गई जिंदगानी भजन बिना....

खाय सोए दिन-रात गवायो,

कियो बहुत नादानी भजन बिना,

बीत गई जिंदगानी भजन बिना....

धन योवन और माल खजाना,

सब यहीं पर छूट जानी भजन बिना,

बीत गई जिंदगानी भजन बिना....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।