तकदीर बनाने वाली मां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तकदीर बनाने वाली मां मेरी कैसी तकदीर बनाई है,

मेरी कैसी तकदीर बनाई है, मेरा कैसा भाग बनाया है,

तकदीर बनाने वाली मां....

एक माला है जो टूट गई,

और मोती सारे बिखर गए,

मैं उन्हें जोड़ नहीं पाई मां, मेरी कैसी तकदीर बनाई है,

तकदीर बनाने वाली मां....

एक मटका है जो फूट गया,

और पानी सारा बिखर गया,

मैं उसे जोड़ नहीं पाई मां, मेरी कैसी तकदीर बनाई है,

तकदीर बनाने वाली मां....

एक डाली है जो टूट गई,

और पत्ते सारे बिखर गए,

मैं उन्हें जोड़ नहीं पाई मां, मेरी कैसी तकदीर बनाई है,

तकदीर बनाने वाली मां....

एक अपने हैं जो रूठ गए,

और रिश्ते नाते टूट गए,

उन्हें मिला नहीं पाई मां, मेरी कैसी तकदीर बनाई है,

तकदीर बनाने वाली मां....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।