जग रुसदा ते भावे रुस जावे

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जग रुसदा ते भावे रुस जावे रुसी ना माँ शेरावालिऐ,

हो तेरा बचड़ा वास्ते भावे, रुसी ना माँ शेरावालिऐ,

जग रुसदा ते भावे रुस जावे....

भावे ओ करोड़ दा भावे होवे लख दा,

लाल तेरा किसे दी भी परवा ना करदा,

तेरा हथ सिर अपने ते चावे, रुसी ना माँ शेरावालिऐ,

जग रुसदा ते भावे रुस जावे....

होर किसे दर ते मै सर नू झुकाना नई,

मन के मै तैनू किसे होर नू मनाना नई,

कर ओना उते मेहरा दे साये, रुसी ना माँ शेरावालिऐ,

जग रुसदा ते भावे रुस जावे....

नाम वाले रंग विच रंग जो रंगादे ने,

कंडे भी ओहना दे लई फूल बन जांदे,

तेरा हथ सिर अपने ते चाहे, रुसी ना माँ शेरावालिऐ,

जग रुसदा ते भावे रुस जावे....

मेरे वलो दुनिया ये भावे मुख मोड़ ले,

सह लवागा मै भावे दिल मेरा तोड़ दे,

तेरा सया बिछौडा ना जावे, रुसी ना माँ शेरावालिऐ,

जग रुसदा ते भावे रुस जावे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।