यही अरदास है बाबा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

अपने चरणों मे साई जी सदा बिठाकर रखना,

जैसे भी हालात हों मुझको दूर कभी ना करना,

यही अरदास है बाबा, मेरी अरदास है बाबा...

भूलभुलैया है ये दुनिया राह भटक ना जाऊं,

हाथ जोड़कर साई जी मैं तुमसे इतना चाहूँ,

मेरे सिर पर साई अपना हाथ सदा ही रखना,

जैसे भी हालात हों मुझको दूर कभी ना करना,

यही अरदास है बाबा, मेरी अरदास है बाबा....

राहों का मुझे पता नही मंजिल कैसे पाऊंगा,

आपके बिन दो कदम भी साई चल मैं नहीं पाऊंगा,

मेरे उंगली पकड़के साई साथ हमेशा चलना,

जैसे भी हालात हों...

जो कुछ पाया इस जीवन मे आपसे ही तो पाया,

इस जीवन मे आपने मेरा हर पल साथ निभाया,

जैसे अब तक साथ निभाया वैसे निभाते रहना,

जैसे भी हालात हों....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।