मस्ती चढ़ गई दाता जी दे नाम दी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मस्ती चढ़ गई दाता जी दे नाम दी,

आनंदपुर वाला कटे दुखड़े तमाम जी,

मस्ती चढ़ गई दाता जी दे नाम दी....

लग जे लगन जदों भगता नु रब दी,

भूल जावे होश फिर इस सारे जग दी,

चढ़दा इ दिन कदों हुंदी फिर शाम जी,

मस्ती चढ़ गई दाता जी दे नाम दी....

दुखा दिया सागरा चो देवे जो किनारा जी,

करके दीदार जिदा मिल जे नजारा जी,

लुटदा एह भगता नु ओह नजरा दे नाल जी,

मस्ती चढ़ गई दाता जी दे नाम दी....

खुल गए ने बंद तकदीरा वाले ताले जी,

चाह सुखराज हूँन जांदे ना संभाले जी,

रोहित ते किरपा हारा वाले दी,

मस्ती चढ़ गई दाता जी दे नाम दी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।