तारदे मेरा डूबेया बेड़ा तारदे

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॥ पावन पाठ ॥

तारदे तारदे मेरा डूबेया बेड़ा तारदे,

मेरे होते हारा वालया,

डेरा दर तेरे ला लिया,

मेरा बिगड़िया काज सवार दे,

तारदे तारदे....

तेरे दर दी शान निराली ऐ,

तू सारे जग दा वाली ऐ,

इक नजर कर्म दी कर दाता,

मेरे सारे दुखड़े हर दाता,

तू निगाह मेहर दी मार दे,

तारदे तारदे....

सुनिया तू दुखड़े हरदा ऐ,

खुशियाँ नाल झोलियाँ भरदा ऐ,

तेरे दर ते न कोई थोड़ प्रभु,

तेरे वरगा न कोई होर प्रभु,

विच सारे संसार दे,

तारदे तारदे....

तेरा दर छड के मैं जाना नही,

दुःख होर किसे नु सुनाना नही,

इक तुहियो मेरा दर्दी ऐ,

तेरे बिन न मेरी सरदी ऐ,

भूल हो गई दिल चो विसार दे,

तारदे तारदे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।