आज खुशियां दा दिन है आया

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॥ पावन पाठ ॥

आज खुशियां दा दिन है आया दर्शन देयो दाता जी,

दर्शन देदो दाता जी झोलियाँ भर दो दाता जी,

संगता दुरो चल के आइया दर्शन देदो दाता जी....

जी करदा मोर बन आवा तेरे दर ते पेहला पावा,

तेरे रज रज दर्शन पावा दर्शन देदो दाता जी,

संगता दुरो चल के आइया दर्शन देदो दाता जी....

तेरे दर ते आन सवाली तेरे बोलन जय जय कारे,

दर ते नच्दे टपदे सारे दर्शन देदो जी,

संगता दुरो चल के आइया दर्शन देदो दाता जी....

तेरी लगदी सूरत प्यारी, तेथो जिंद जान है वारी,

दर्शन दे दो बारी बारी झोलिया भर दो दाता जी,

संगता दुरो चल के आइया दर्शन देदो दाता जी....

दास सदा गुण तेरे गावे तेरी महिमा सब नू सुनावे,

तेरे रज रज दर्शन पावा दर्शन देदो दाता जी,

संगता दुरो चल के आइया दर्शन देदो दाता जी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।