जद सांवरे ने फड़ लई मेरी बांह

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जद सांवरे ने फड़ लई मेरी बांह

हो गई मेरी बल्ले बल्ले....

वो तो रहता मेरे हर पल साथ,

होगी मेरी बल्ले बल्ले,

होये मेरी बल्ले बल्ले, ओये मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ हो गई मेरी बल्ले बल्ले......

बिगड़ा मुकदर मेरा पल में सवारा है,

डूबी हुई कश्तियो को दे दिया किनारा है,

मेरे होगे निराले ठाठ,

होगी मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ हो गई मेरी बल्ले बल्ले.....

श्याम के बिन मुझे कोई नी भाता,

मेरा मेरे सांवरे से प्रेम का ही नाता,

बांधी सतगुरु से प्रेम वाली डोर मेरी हो गई बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ हो गई मेरी बल्ले बल्ले.....

श्याम के जैसा कोई और नही देखा,

बिगड़ी हुई किस्मतो की बदले है देखा,

अब तो मौज में कटे मेरी रात,

होगी मेरी बल्ले बल्ले,

जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ हो गई मेरी बल्ले बल्ले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।