दुनिया में अपना कोई नहीं

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

उड़ जा रे हंसा स्वर्गलोक दुनिया में अपना कोई नहीं,

दुनिया में अपना कोई नहीं इस जग में अपना कोई नहीं.....

दशरथ के बेटे चार हुए,

दशरथ के बेटे चार हुए,

जब प्राण तजे तब कोई नहीं,

उड़ जा रे हंसा स्वर्गलोक दुनिया में अपना कोई नहीं.....

सीता की सखियां हजार हुई,

सीता की सखियां हजार हुई,

जब वन को गई तब कोई नहीं,

उड़ जा रे हंसा स्वर्गलोक दुनिया में अपना कोई नहीं.....

लक्ष्मण के साथी हजार हुए,

लक्ष्मण के साथी हजार हुए,

जब शक्ति लगी तब कोई नहीं,

उड़ जा रे हंसा स्वर्गलोक दुनिया में अपना कोई नहीं.....

रावण के नाती हजार हुए,

रावण के नाती हजार हुए,

पर अंत समय पर कोई नहीं,

उड़ जा रे हंसा स्वर्गलोक दुनिया में अपना कोई नहीं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।