मेवानगर के देव ओ भैरव, वंदन सौ सौ बार

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॥ पावन पाठ ॥

मेवानगर के देव ओ भैरव, वंदन सौ सौ बार,

तु ही हैं करतार हमारा, तु ही पालनहार ॥

पूनम का जब दिन आए, तो मन सबके हुलसाये,

तेरे दर्शन करने को सब दूर दूर से आये ।

नर नारी सब बालक मिलकर तुझको शीश नमाए,

जग हितकारी दादा तुमको कोटि कोटि प्रणाम ॥

तु ही हैं करतार हमारा, तु ही पालनहार...

हम दुःखीयरे, आए द्वारे, और कहां हम जाए,

कष्टों की मझदार से दादा तु ही पार लगाए ।

तेरी शरण मे आए हम तो, तु ही राह दिखाए,

ओ मेरे मतवाले दादा, तु ही तारणहार ॥

तु ही हैं करतार हमारा, तु ही पालनहार...

तेरी महिमा कैसे गाए, तुम हो देव निराले,

सब देवो में देव ओ भैरव बाबा नाकोड़ावाले ।

हम भक्तों की विनती सुन लो, काटो संकट सारे,

सारे भक्त हैं मिलकर बोले, तेरी जयजयकार ॥

तु ही हैं करतार हमारा, तु ही पालनहार..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।